Mera javan


कोई था घर का बेटा जवान
तो कोई था घर की एक लोती संतान
पुलवामा में शहीद होने वाले मेरे देश के एक एक जवान
वो बचा रहे थे दुश्मनो से भारत की सरहद को
तभी तो आप ओर हम मना रहे थे valentain day को
यहा हर कोई कर रहा था अपने अपने प्यार का इजहार,
ओर वहा मेरा जवान जन्नत मैं जाने के लिये तिरंगे मैं लीपटकर हो रहा था तैयार,
किसी मा की आंखे ओर किसी बाप का दिल बेटे को देखने के लिये तरस रहा था
मगर,
वो बेटा पेहेले ही देश के लिये अपनी जान गवा चुका था,
कोई बेहेन थी जीसे अपने भाई का इंताजार था,
मगर,
उस भाई ने अपना दम सरहद्द पर ही तोड दिया था,
अपने पती को चार कंधे पर आते देख , तडप उठा था विरपत्नी का दिल,
मगर,
किस किस को वो दोष देती क्योकी यहा तो हजारो थे उसके कतील
वो संतान भी अपणी मा की कोख में से रोती रही
जिसके पिता की चिता उसके आने से पहले ही जलती रही
मेरा पुरा हिंदुस्थान उस दीन रोया था
पुलवामा पर हमला जीस दीन हुआ था,
मेरे ही देश में आकर उन फरेबियो ने ४० जवानो को शहीद किया था
लेकीन मेरा भारत भी कहा कम था,
उनके ही मुल्क में जाकर ४० का बदला ४०० से लिया था,
मेरे जवानो की जान मुफ्त में कहा गयी थी,
जवानो को इनसाफ दिलाकर ही तो भारत ने चैन की सास् ली थी|

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