अभिव्यक्ति की आज़ादी


अभिव्यक्ति की आज़ादी

रोज़ रोज़ सुन सुन थक चुके है हम ,
आज उसकी , तो कल तुम्हारी
अभिव्यक्ति की आज़ादी ।
तुम कुछ कहो , तो सच ।
तुम कुछ कहो तो , अभिव्यक्ति की आज़ादी ।।
हम कुछ कहें , तो हम सांप्रदायिक ।
तुम्हारे विचार सर्वोपरि ,
तो हमारे विचार सांप्रदायिक कैसे ?
क्या हमे नहीं है , अभिव्यक्ति की आज़ादी

हम उठाएं ज्वलंत मुद्दे ,
हम पूछे कठिन सवाल ,
हम करे राष्ट्र प्रेम की बातें
हम बताएं राष्ट्र को सर्वोपरि ,
तो हम गलत ,
पर तुम जब करो , देश विरोधी बातें ,
तुम बनाओ त्योहारों का मजाक ,
तुम पहुचाओ किसी के विचारो को ठेस ,
तुम करो किसी की संस्कृति धूमिल ,
तो तुम सही कैसे ?
तुम सवाल करो , तो तुम्हारी अभिव्यक्ति की आज़ादी
पर हम सवाल करें , तो लोकतंत्र खतरे में कैसे ?

आखिर क्यों हैं , तुम्हारे दोहरे मापदंड ?
क्यों हैं , तुम्हारी क्रूर मानसिकता ?
आखिर क्या खोट है तुम में ?
क्यों हो इतने अभिमान में तुम ,
जो खुद समझ बैठे हो , स्वयं को श्रेष्ठ ।

अभियक्ती की आज़ादी हर किसी को है ,
फिर चाहे वह कोई भी हो ।
विचारो में मत भेद होना ,
आम बात है ,
पर देश विरोधी ताकतों को कभी स्वीकारा नहीं जाएगा ।

- सौम्या चतुर्वेदी

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