आंसू प्रेम के


एक आंसू गिरा
मैं हल्का हुआ
मिट्टी से था प्रेम
रूप जिसका बंधन
महसूस होती थी
ईप्साओ की जकड़न
उधड़ गई थी
रिश्तों की कतरन
जो हैं ही नहीं
भला क्यों उसका रुदन

एक आंसू गिरा
मैं भर गया
हुआ आत्मिक प्रेम
रूप जिसका स्वतंत्र
खुशियों का यहीं
सच्चा मंत्र

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