इश्क़ ने किया निकम्मा


इश्क ने किया निकम्मा वरना आदमी में भी कमाल था
बचपनसे ही इश्क का मेरे मचा हुआ बवाल था
इश्क होता है क्या जब सबको यह सवाल था
उसी दौर में यारों मैं इश्क से मालामाल था

इश्क प्यार मोहब्बत को तब से मैंने जाना था
दिल में था एक जज्बा बस किसी को पाना था
जिसको था पाना दिल में उसके किसी और का ठिकाना था
चली गई बना के मुझे मैं भी क्या दीवाना था

प्यार होता है प्यारा सा जीवन का वही सहारा था
किसी और का प्यार समझना समझ से काफी मुश्किल था
जीवन की चाह थी मुझे जीवन में कुछ करना था
इश्क ने किया निकम्मा वरना आदमी में भी कमाल था
- सचिन

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