एक पहल रिश्ते की ओर


सुनो… सुनो न!
कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें
और बदलके इस रिश्ते को ढेर सारा प्यार देते हैं !
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं!
जो गलतियां तुमने की हैं, जो गलतियां मैंने की हैं!
साथ बैठके आज उन्हें सुधार लेते हैं
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं
प्यार तुमको भी है, प्यार हमको भी है
आओ इस बात को मन से स्वीकार लेते हैं!
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं
थोड़ा तुम मुझे समझ लो, थोड़ा मैं तुम्हें समझ लूँ!
और कारण इस तकरार का जान लेते हैं!
चलो न, वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं
यूं तो तुम भी कुछ वायदे करते हो, और मैं भी करती हूँ!
आओ वायदे का दिल से ऐतबार करते हैं
चलो न वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं
प्लीज़ चलो न
वक़्त रहते इस रिश्ते को सवार लेते हैं

Poem Rating:
Click To Rate This Poem!

Continue Rating Poems


Share This Poem