ए खुदा


दुनिया में हमारा होना सजा सा लगे
खुशियों को छू भी पाना सपना सा लगे
जिंदगी कट जाती है बेबसी में
आखिरी सांस भी ना ले पाए खुशी से
ना जाने क्या गलती हुई??
ए खुदा तू मुझको बता

दिन गुजरते हैं, भीख मांगने से
क्यों हम पढ़ने के लायक नहीं
तन ढकने को क्यों ?? कपड़ा नहीं
सोते हैं हम सड़कों पर सरेआम नंगे यूं ही
आग है , पर खाना नहीं
खुश हो जाते हैं हाथ सेक कर यूं ही
ना जाने क्या गलती हुई??

कभी पूछो हमसे क्या?? हमारे कोई अरमान नहीं
क्या?? मां-बाप को खुशियां देना हमारा सपना नहीं
खुश होते अगर 100 कमियां होती
मगर , गरीबी जेसी सजा हमको न मिली होती
खुदा तू मुझको इतना बता
जिंदगी क्यों ?? है हिस्सों में बटी
हमसे क्या गलती हुई जो गरीबी हमारी सज़ा है बनी.....

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