काश


जिंदगी भी क्या क्या दिखाई देती है, क्या क्या सीखा देती हैा
क्यों रुलाती है जिंदगी,
क्यों ऐसे लोगों से मिलती है जिंदगी, जिनका मिलना तकदीर में नहीं होता,

क्यों किसी के साथ होने से हम खिल उठते है,
क्यों किसी का बात करना इतना प्यारा हो जाता है,
क्यों एक तरफा प्यार इतना बुरा होता है,
क्यों एक इन्सान घुट घुट कर जीता रहे,
क्यों एक झलक प्यार की आस मैं बैठा रहे,
एक उमीद के सहारे जीता रहे
काश प्यार उसे भी होता, काश एक तरफा प्यार कभी ना होता,

जिंदगी तू ही बता क्या मैं इतना बुरा था, या तकदीर ही कुछ एैसी थी, या समय ही खराब था,

क्यों मैं खुद को रोक न पाया, क्यों उसका न बात करना इतना चुभ रहा है, क्यों दिल दुख रहा है
काश पहला प्यार इतना बुरा न होता, काश एक तरफा प्यार कभी ना होता,

Poem Rating:
Click To Rate This Poem!

Continue Rating Poems


Share This Poem