किसको इश्क कहे ?


किसीने पुछा की हमे कैसे पता चले की हमे मुहब्बत या इश्क हुआ है?
मेने बताया की अगर....

अगर दिल की धड़कने तेज होकर रुक जाती हो,
अगर दिमाग विचारो से सुन्न होकर रुक जाता हो,
अगर साँसे चन्द लम्हो के लिए रुक जाती हो,
अगर जुबान पे लफ्ज़ लड़खड़ाकर रुक जाते हो,
अगर मन विचलित होकर उठ जाता हो,
अगर जुल्फों की पहेलियों में जीवन की उल्जन खो जाती हो,
अगर बिना पिए ही नशा सा महसूस हो जाता हो,
अगर उसे देखते ही भूखा पेट भर जाता हो,
अगर रेगिस्तान में मृगजल से प्यास बुझ जाती हो,
अगर उसे पाते ही इच्छाए संतुष्ट हो जाती हो,
अगर घड़ी की सुईया समय पे रुक जाती हो,
अगर स्वर्ग की अप्सराएं शबनम के फूल बेखरती जाती हो,
अगर नींद आँखों से गुमराह हो जाती हो,
अगर ख्वाब की वो परी उभरकर सामने आ जाती हो,
अगर दिन में सितारोंवाला आसमान नजर आ जाता हो,
अगर शुष्क हवाएं सोंघीसी औंश से भिगाना जाती हो,
अगर आकाश सप्तरंगी मेघधनुष से ढँक चूका हो जाता हो,
अगर बेजान जहाँ में फरिश्तो की आकाशवाणी सुनाई दी जाती हो,
अगर उसके अश्को को अपनी हंसी की छिप में भर लेने का मन हो जाता हो,
अगर उसकी बातों में वो रूह को सुकून देनेवाली रवानी मौजूद हो जाती हो,
अगर वातावरण में बेपरवाह आवारगी सा फितूर चढ़ जाता हो,
अगर अपनी प्रेमकहानी को किसी संगेमरमर के पत्थर पे जड़ने की बात होती हो,
अगर उसके छूने से मेरे जैसा मरा इंसान जिन्दा हो जाता हो,
अगर उसकी जूठी कसमो पे हमारा कारवां रुक जाता हो,

तो जनाब अगर मगर छोडो यही वो बेपन्नाह प्यार हे, जिसे हम मुहब्बत या इश्क़ कहते हे ।

- आकाश शाह

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