कुछ कर गुज़र और बन मिसाल बहती गंगा के नज़ारे न देख।।


राते काई गुलज़ार होंगी माना
घर अंधेरा देख तू
आसमान के तारे न देख

कुछ कर गुज़र और बन मिसाल
बहती गंगा के नज़ारे न देख।

चेहरे काई मिलेंगे राहों में
खुद को तेरा हमसफ़र कहने वाले
तू सिर्फ़ मुल्क की चिंता कर
गिरती- बदलती सरकारें न देख
.

तू समंदरो का यार है
बैठा यू झीलों के किनारे न देख।

राते काई गुलज़ार होंगी माना
घर अंधेरा देख तू
आसमान के तारे न देख।। जा बहला ले दिल को
इजाज़त है तुझे
ख्वाब रोज़ देख
पर इतने सुहाने न देख
.
एक दरिया है ये दूर
दूर तक फैला हुआ
आज अपनी बाजुओं को देख
पत्वारे न देख।

राते काई गुलज़ार होंगी माना
घर अंधेरा देख तू.....
आसमान के तारे न देख।। ...................…
...................... जो ठान लिया वो कर गुज़र
देख तो सिर्फ़ अपनी मेहनत
किसी के बाप की GUHAARE न देख

राते काई गुलज़ार होंगी माना
घर अंधेरा देख तू
आसमान के तारे न देख....
.

कुछ कर गुज़र और बन मिसाल
बहती गंगा के नज़ारे न देख।।

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