क्या कसूर उन लोगों का


क्या कसूर उन लोगों में,
सरकार हाथों मर जाते हैं ।
हंसते खेलते परिवार में,
गम का तोहफा दे जाते हैं ।
आजादी के रास्ते से,
आगे बढ़ना सिखाते हैं ।
परमाणु के पथकर से,
घंटे खड़ा हमें कर जाते हैं।
मर जाएंगे हाथ न फैलाएंगे,
सम्मान वतन का दो गुना बङाएंगें ।
धड़कता दिल देश के लिए,
गुस्ताखी क्यों अपनों के लिए ।
जब-जब हम से कोई टकराया है,
खून पसीना बहाया है,
लोग हैं हम एक वतन के,
विश्वास रखो अपने भाइयों में ।
सड़क पर मरते वे हर समय पर,
घर बैठे रोते हम उनकी याद पर,
मालूम पड़ता हर रोजो में,
ज्वाला की आग जले हर सीने में ॥

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