चांद का टुकडा……


चांद का तुकडा...

मेरे अपणे ही क्लासरूम में
इक चांद का तुकडा रहता है..
जब भी वो हसता था दिल खिल उठता था...
थोडा भोला है..
पर अपनी जिम्मेदारी समजता है..
छोटी सी उमर में बडे काम करणे का साहस रखता है...
पर दुनिया से अनजाण दुनिया खेल न समजता है...
हमने की थी कोशिश उसे पानें की
पर क्या करे जनाब वो तो चांद का तुकडा है , आसानी से थोडी हाथ आयेगा.. तो क्या हुवा थोडा इंतजार ही सही...

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