जननांग ( Know about FGM)


हद्द!! You know LIMIT... किसी चीज़ की नहीं होती।
ना उकूबत की, ना मोहब्बत की,
ना दरिंदगी की ना ही इंसानियत की।
अब दरिंदगी की हद्द तुम ASIFA कहो या NIRBHAYA,
वो 8 महीने की बच्ची कहो या HATHRAS की बेटी...
क्या फर्क पड़ता है।।
ये तो फिर भी ज़िंदगी के किताब के कुछ ही पन्ने हैं,
जो अब तक खोले गए हैं।
बाकी तो चलते फिरते या तो कफ़न हो गए हैं,
या ज़िंदा रहते थमी सांसों के साथ दफन हो गए हैं।।
आओ तुम्हें दरिंदगी के एक और पहलू से रूबरू कराते हैं,
ज़रा तुम भी तो देखो किस कदर लोग हद्दें लांघ जाते हैं।।

So, as my title depicts the word FGM, now let me tell you what the word FGM means!!
Say it FGM or FGC that is female genital mutilation/ cutting in which the external female genitalia is being cut either partially or totally as RITUAL.

लगा ना सुनकर,
ये क्या है और क्यों है।
तो सुनो! दुनिया ना तुमने ना मैंने पूरी देखी है,
ये तो बस आहट है, हैवानियत तो अभी शुरू हैं।।

I would like to tell you that the main common reasons behind FGM is RELIGION, PRESERVATION OF VIRGINITY, MARRIAGE ABILITY, ENHANCEMENT OF MALE SEX PLEASURE.

इस दुनिया के लगभग हर कोने में ये परंपरा है पनप रही,
एक बच्ची जिसे कुछ पता नहीं उसकी हर धड़कन है तड़प रही।।

Yes, this FGM is carried out on young girls between infancy and age 15 which is done by women of absolutely no practice in surgery. Then even they do it with full confidence just because they are the eldest of the family member.

इस 780 करोड़ की आबादी में,
अब तक 200 करोड़ जूझ चुकी बर्बादी से।
तुम्हे क्या बताऊं क्या क्या हैं उन्हें सहना होता
मैं तुम्हे क्या बताऊं कि क्या क्या हैं उन्हें सहना होता,
एक नहीं दो नहीं बल्कि महीनों महीनों महीना होता।।
कभी कैंसर कभी मां ना बन पाने का दुख हैं उनको सहना पड़ता,
जाने कितनी लड़ाई उनको अपने हक के लिए लड़ना पड़ता।।
अरे! हम मर्दों से क्या खौफ खाए,
जब औरतें औरतों से ही चूर हो गए,
रीति रिवाज, परंपरा, शुद्धता,
लोग इन सब में ही मख़मूर हो गए।।
अब तो रावण भी शर्मसार हुए,
और द्रौपदी भी हार गई।
कोई देव नहीं बचा सकते अब,
यहां इंसानियत ही इंसानियत मार गई।।

हम क्या कहे? अब इससे ज़्यादा क्या कहे??
सहते सहते थक गए तुम बता दो और कितना सहे?
वो कहते हैं की अंधेरे के बाद सवेरा होता है
सवेरे का तो पता नहीं पर अंधेरे के लिए एक चांद ही दे दो,
हमने खुल्द की कामना की ही नहीं बस एक टुकड़ा आसमान ही दे दो।।
उड़ने के लिए पंख थोड़ी मांगे है,
कम से कम सांस लेने के लिए कब्रिस्तान ही दे दो।
बस सांस लेने के लिए कब्रिस्तान ही दे दो।।

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