जब बहन घर से विदा होती है


शादी से पहले और शादी के बाद भी रोया हू
तुझसे दूर होने के डर से कहा चैन से सोया हु .....
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जज्बात में छुपा दूंगा ।
आँशु छुपा तुम देना
मेहंदी की रस्म है
फिर न रुला तुम देना||
आखो के निकलते आँशू
आखों में समा देना।
अगर रोने बैठू तो मै
एक सा लगा तुम देना ||
मैं मर्द हु ये बता तुम देना
कही सारे राज न खोल दू
ऐसे गले लगा तुम देना (1)
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हाल इतने बुरे हैं कि
तुझसे क्या बताऊँ अब | |
तुझसे किये वादे
पूरे कैसे पूरे निभाउं अब ||
नही उठती तेरी डोली
मेरे इन कांधो में
होस खो बैठा हूँ अब
तेरे इन बाहों में ||(1)
तेरे इन बाहों में

मम्मी पापा, ओर मैं
कहा चैन से जी पाएंगे |
ससुराल उसका अच्छा हैं
अब सब से यहीं बतलायेंगे ||
बेटी घर से विदा हुई हैं
भला कौन माँ खुश रह पाएगी
मम्मी को अब ये चिंता रोज ही सतायेगी |||
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उठ गई है तेरी डोली
बज गए है नगाड़े |
तूझे नए घर है जाना
अब सभी यही है जानते ||

खुशियों के संग आयी थी तू
खुशियों के संग जायेगी |
अब अपने नये घर को भी तुम
स्वर्ग ही बनाओगी ||

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मम्मी की प्यारी लड़की
पापा की दुल्हारी है तू
नये घर मे लाज है रखनी
ये सब कुछ ही जानती है तू

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