जिंदगी


जिंदगी क्या है किसे पता है
सब तो बस एक तलाश है,
कभी खुशीयों की नदी
तो कभी गम का सागर है,
जीवन तो बस कभी ना भरने वाला गगर है|
क्या उजाले से भरी पुनम की रात है जिदंगी?
या अमावस की तरह अंधकार है जिदंगी?
किसे पता क्या है जिदंगी|
कभी किसी का जिदंगी मे आना
कभी ना चाहते भी दूर चले जाना,
कभी सिर्फ नजरों से सब कुछ पा लेना
कभी सब पाकर भी कुछ ना मिलना,
क्या सिर्फ आंखों कि नमी है जिदंगी?
या हर पल मुशकुराहट का नाम है जिदंगी|
आखिर किसे पता है क्या है जिदंगी
कुछ नहीं कुछ नहीं बस एक सवाल है जिदंगी.....

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