तुझ पे ही तो था भरोसा।


तुझ पे ही तो था भरोसा
जिदंगी की इस दौड़ में
जब पहली बार कदम रखा
तेरी उंगली पकड़ के ही तो चलना सीखा
तेरी वजह से ही तो सब दर्द सेहना सीखा
तुझ पे ही तो था भरोसा
तुझ पे ही तो था भरोसा
तेरी उंगली पकड़ के ही हर जगहें गया
हर कठिनाइयों में भी तेरे संग गया
तेरा दिया हुआ हमने बड़े मज़े से खाया
तुजको हमारी फिक्रर में ही डूबा पाया
तुझ पे ही तो था भरोसा
तुझ पे ही तो था भरोसा
तूने हमें सही गलत का फर्क बताया
मेरे हर गलत क़दम पे दात लगाया
तूने मुझे आज एक बेहतर इनसान बनाया
तूने मेरे अंदर एक हौसला जगाया
तुझ पे ही तो था भरोसा ।।

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