दहेज़


अपने घर को खाली करके
दूसरों का घर भर दिया
नहीं होगा ऐसा जीवन में
जिसको दहेज देना न पड़े
यह कहाँ कि होती बहादुरी
जिसमें पिता अपनी संपति
दूसरो के लिए खत्म किया
चलो हम आवाज उठाए
खत्म कर दे इस प्रथा को
जिससे सबको मिले खुशियाँ
न बेटी होगी किसी कि भार
नए जबाने कि बेटी होती
अपना अलग पहचान बनाती
जीवन में अलग पहचान बनाकर
अपने माता-पिता की मान बढाती। ।

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