दूरियां


भीड़ मे भी पहचान लेता जिन्हें था
आज पास होकर भी वो अंजान है
कभी होठो पर नाम जिनका हमेशा था
आज उनके नाम से एक नफरत सी है
जिनके आंखो से आशु कभी निकलता ना था
आज खुशी में भी दरिया बह जाता है
मगर दूरियां जों भी हो,दूर होके भी वो मेरे पास है।

बांते जों कभी उनका दिल जीत लेती थी
आज कांटो कि तरह दिल में चुभ जाती है
कभी जिनके नाम से सुबह होती थी
आज ख्वाबों में भी उनका जिक्र नहीं है
रोती थी जो हर दर्द में कभी मेरे
आज आंशुओ में भी वो मुस्कुराती है
पर सोचता हूं दूरियां जो भी हो
दूर होके भी वो मेरे पास है,दूर होके भी वो मेरे पास है।

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