नई एकता


यह युद्ध है अनेक पक्षों का
अनंत समय से चला आ रहा है।
अनंत वर्षा से भारत को
दीमक की तरह खा रहा है।
जात- पात लिंग और धर्म,
फैला है यह भीषण दानव।
सबसे महान होता है कर्म
क्यों नहीं समझते मानव।
हिंदू ,मुस्लिम, सिख, ईसाई,
आपस में है भाई-भाई।
यह पंक्तियां पढ़कर भी किसी ने
यह भावना न दिखाई।
क्रांतिवीरों के नाम याद है
कर्म याद करना भूल गए।
भूल गए कि देश के खातिर
वह अपने प्राणों से खेल गए।
आओ मिलकर उन्हें याद करें
अब हाथ हमारे साथ करें।
इस बार यह कर्तव्य निभाएं
सब सच्चे मन से तिरंगा फहराएं।

....दिक्षा पांडेय....

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