नारी शक्ति


सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविन्द ना आयेंगे,
खुद से रक्षा करनी होगी ये लोग बचा ना पाएंगे।
रामराज्य में जब सीता हर ली गई थी उपवन से,
ये तो रावण राज्य इसमें कहां से लक्ष्मण आयेंगे।
जहन के अंदर दया नहीं है यहां के निर्मम लोगों में,
जिसको देखो मिला हुआ है पर स्त्री के भोगों में,
बन जाओ तुम मां चंडी सी दया रूप ये छोड़कर,
रख दो एक एक अत्याचारी कि गर्दन को मरोड़कर,
छूने की हिम्मत ना होगी ना कभी सामने आयेंगे,
खुद से रक्षा करनी होगी ये लोग बचा ना पाएंगे।
जिस दिन नारी शक्ति इस क़दर खुद से बनी प्रबल होगी,
सभी बेटियां निडर रहेंगी अधर्मियों की बलि होगी,
ये धरा मुक्त हो जाएगी इस कदर बढ़े हुए पापों से,
नहीं गुजरना पड़ेगा किसी भी नारी को विलापों से,
शौर्य, मान और लज्जा को ये अधर्मी डिगा ना पाएंगे,
खुद से रक्षा करनी होगी ये लोग बचा ना पाएंगे।

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