प्रेरक नदी


मैं अपनी जिंदगी का प्रेरक उस नदी को बनाना चाहता हूँ
जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने तक निरंतर चलती रहती है
जो समुद्र से मिलने के लिए निरंतर बहती रहती है
जिसकी मंजिल कोसो दूर है और उसके जोश की आवाज सुनाई पड़ती उससे भी दूर है

जो निरंतर लड़ते रहती है ऊँचे,विशाल पहाड़ो से अपनी मंजिल पाने को
मैं उस नदी को अपना प्रेरक बनाना चाहता हूँ,
जो कभी किसी और की गुलाम ना बनी
जो लगातार अपने बाँध में छोटी-छोटी अदृश्य दरारें बनाकर अचानक से बाढ़ के रूप में अपना क्रोध दिखाती है
मैं उस नदी सा अजेय बनना चाहता हूँ
जो अपनी मंजिल तक पहुँचने का रास्ता स्वंयम निर्माण करती है
मैं उस नदी सा आत्मनिर्भर बनना चाहता हूँ

एक पंक्ति में कहूं तो मैं उस नदी सा चुलबुला,शांत,शक्तिशाली व आत्मनिर्भर बनना चाहता हूँ

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