बताओ


क्या अस्तित्व है मेरा
कोई बताओ ना मुझे
क्या पहचान है मेरी
कोई समझाओ ना मुझे।

मैं नारी हूं या पुतली हूं
कोई बताओ ना मुझे
क्यों कोशिश करते हो हरदम
मुझे नीचे गिराने का
क्यों वस्त्र फाड़ते हो मेरा
अपने शौक को पूरा करने के लिए
कोई समझाओ ना मुझे।

क्यों मार देते हों ,मेरे सपने को
अपने आप को ऊपर बढ़ाने के लिए
कोई बताओ ना मुझे
दर्द देकर खुश होते हो तुम
क्यों खुश होते हो
बताओ ना मुझे
काजल साह(स्वरचित)

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