बहुत याद आती हो तुम


सुनो ! बहुत याद आती हो तुम

मेरे ख्वाबों में ऐसे ही क्यों आ जाती हो तुम
मुझे बेतहासा तड़पा कर क्यों ऐसे ही चले जाती हो तुम

सुनो ! बहुत याद आती हो तुम

बहुत मीठी थी वह तुम्हारी बातें
क्या ऐसी ही बातें सबसे कर जाती हो तुम
डूबकर तनहाइयों में क्या सबके गम ले जाती हो तुम

सुनो ! बहुत याद आती हो तुम

किसी झपकी की तरह मेरे ख्यालों में आती हो तुम
और आकर फिर मुझे बहुत सताती हो तुम
हम कुछ खास हैं या ऐसी बदमाशियां सबके साथ कर जाती हो तुम

सुनो ! बहुत याद आती हो तुम

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poem is about the remembering the past love affair