बेटियाँ


बेटियाँ सबकी प्यारी होती हैं सबकी दुलारी होती है ;
वह तो समय उन्हें अलग दिखाता है;
जन्म लेती जहां वहां पर अपना कोई नहीं ;
जाती वहां जहां से अपनापन नहीं ॥

बस एक यही दो बातों को संभालने
में जीवन गुजार देती हैं ;
कभी नहीं समझता कोई उन्हें
हर कोई तो उन्हें ही समझाता है ;
यही परंपरा जिसने बेटी को पराया कह दिया ;
अपना होते हुए भी दूसरों का कह दिया ॥

बेटियों का सब कुछ बदल जाता है
यह अपनों ने ही सिखा दिया;
बेटियों को अपना घर भुलाना बता दिया ;
अब इससे ज्यादा और क्या सीखा पाते
सब कुछ भूल गई हो ;
दूसरों को संभालते खुद को भूल गई हो ;
यही रीत चली आ रही है बेटियाँ अपनी
होकर भी पराई कहला रही हैं ॥

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