बेटियों पर कविता


बेटियाँ जो की घर की खुशियाँ हैँ
बेटियाँ जो की राष्ट्र की शान हैँ,
और तुम्हारा सम्मान हैँ l
मत मानना तुम इनको बोझ
नहीं तो दोगे स्वयं को दोष l

क्या भूल गए वह काल
ज़ब बेटियों की होती थी जय -जय कार l

ज़ब - ज़ब देश पर आयी कोई आफत
बेटियों ने कर दिया उन्हें साफ
जिस - जिस ने किया बेटियों का अपमान
हो गया है उनका काम - तमाम l

भरी सभा मे किया था द्रोपदी का अपमान
तब तो देखा ही होगा क्या हुआ था अंजाम
अरे याद करो तुम उस माता को
जिसको छू ना सका रावण कनिको l

भारत माता की शान हैँ बेटीयाँ
हमारी मन हैँ बेटीयाँ, सबके आँखों की चाँद हैँ बेटियाँ l
पर तुम करते इनका ही अपमान
क्या नहीं जानते इसका परिराम l

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