बेदर्दी बालमा


ओह सजना बेदर्दी बालमा
तुम को मेरा मन याद करत्
पर चाँद को क्या मालूम
चाहता उसे कोई और!
वह बेचारा दुर से देखे
करे न कोई शोर!
तुम का जानो?
तुम ही मेरी मंदिर
तुम ही मेरी देवी, तुम ही पूजा
याद मे तेरे जाग-जाग कर
रात-भर करवटे बदलते रहे
अब तो मेरी ये हालात हो गई
सहा न जाए, रहा न जाए
देखो न मेरा दिल मचला जाए
तुम्हे देखा और बदल-बदल गया ।।

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