भारत वंदना


"भारत वंदना"
- दर्शन शर्मा
प्रार्थना-इबादत-अरदास से शुरू होती, यहां की भोर-विभोर है,
कहीं पर टोपी, कहीं कृपाण, तो कहीं जनेऊ की डोर हैं,
ना सिख-हिंदू-मुसलमान, मैं बस इंसान को,"इंसान" कहने आया हूं।
मैं भारत माता की वीर-गाथा गाने आया हूं।।

कोई हंसमुख, कोई श्रेष्ठ तो कोई चंद-चकोर है,
कहीं पर उर्दू, कहीं पर फारसी,तो कहीं हिंदी का शोर है,
पीला-चिश्ती-भगवा नहीं, मैं हाथ "तिरंगा" लाया हूं।
मैं भारत माता की वीर-गाथा गाने आया हूं।।

कहीं पर लंगर, कहीं दावत तो कहीं पे छप्पन भोग है,
कोई दशमेश-पिता की संतान यहां, तो कोई माखन चोर है,
ना ईद-दिवाली-होली, मैं बस "आजादी का त्योहार" मनाने आया हूं।
मैं भारत माता की वीर-गाथा गाने आया हूं।।
मैं भारत माता की वीर-गाथा गाने आया हूं।।

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