भ्रष्टाचार


भ्रष्टाचार नहीं कोई आचार।
विकास बाधा का यह आधार।।
रोकथाम करने की इसकी,
किए गए हैं लाखों उपाय।
नियम बनाए लाखो करोड़ों,
फिर भी ना हो पाया काबू।।
कारण कोई समझ न पाया।
असीमित इच्छाओं के वश होकर,
करता मानव यह व्यभिचार।
रोकथाम करने को इसकी,
बतलाता हूं यह सरल उपाय।।
"राष्ट्र द्रोह" की श्रेणी में रखकर,
करो उसका सामाजिक बहिष्कार,
किया है जिसने भ्रष्टाचार।।
{जय हिन्द जय भारत}
~विनय जोशी
उम्र - १३

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