माँ को मेरी ऐसी बहु चाहिए


माँ को मेरी ऐसी बहु चाहिए.........

घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से
वो बोले तो लगे जैसे आज हुयी,
इतना सुकु मिले उसकी आवाज़ से

वो जो अपना सबको बना के रखे,
हमेशा खुश वो रहे सारे परिवार से
कोई बात ना बिगड़े घर मे कभी,
सबको मना ले वो अपने किरदार से
माँ को मेरी ऐसी बहु चाहिए,
घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से

वो जो कह दे की ये काम ना होगा हमसे,
इतना प्यार मिले उसके इन्कार से
सबके होठों पे वो मुस्कान बन के रहे,
अपने पापा के दिए हुए संस्कार से
घर के लोगों और चीजों को अपना समझे,
इतना लगाव हो उसको घर - परिवार से
माँ को मेरी ऐसी बहू चाहिए
घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से

मेरे बेटे के हर सुख दुख मे रहे,
ऐसे जुड़ी रहे जैसे माया तलवार से.
हर मोड़ पे वो ताक़त बने उसकी,
टूटे ना कभी वो किसी हार से.
माँ को मेरी ऐसी बहु चाहिए,
घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से

घर बाहर हर कोई उसकी तारीफ करे,
सब अच्छा कहे उसको उसके व्यावहार से
घर मे टिक ना पाए कोई दुःख का साया कहीं
सब जल जाए उसकी प्यार की आंच से...
माँ को मेरी ऐसी बहू चाहिए,
घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से

घर की मर्यादा को वो बनाए रखे,
इतना गरुर हो हमको उसकी ऐतबार पे...
हमरे घर की वो दुलारी बने
इतना प्यार मिले सबको उसके दुलार से.....
माँ को मेरी ऐसी बहु चाहिए,
घर मे हो रोशनी उसके रुखसार से....

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