मेरे सपनों का हिन्दुस्तान लौटा दो


{ मेर सपनों का हिन्दुस्तान लौटा दो }
“ पल – पल देश को टुकडों में बाट रहे हैं, माँ के सीने में धर्म ए खंजर भोक रहे हैं !
“ माँ ने तो प्यार को ना बाटा था, फिर क्यों माँ को मज़हब में हम बाट रहे हैं !! “

हिन्दे हिन्दुस्तान लौटा दो…..
मेरा हिन्दुस्तान लौटा दो….
मेरे सपनों का हिन्दुस्तान लौटा दो….
नित – नये दंगों का ये फरमान मिटा दो…..
जात – पात का ये भेद मिटा दो…..
मज़हबे ए सोच मिटा दो….
धर्मों का कोई ये अधर्म मिटा दो…..
अनेक धर्मो को आज फिर से एक धर्म बना दो….
पूराना वाला कोई मेरा देश बना दो….
एक धर्म का मेरा देश बना दो….
एक धर्म हिन्दे मेरा हिन्दुस्तान बना दो….
कोई मेरा हिन्दुस्तान लौटा दो….
मेरे सपनों का हिन्दुस्तान लौटा दो…!
गुलामी से पूर्व वाला मेरा देश लौटा दो….
आजाद ए हिन्द वाला मेरा कोई देश लौटा दो…
एक धर्म का वो खट्टा – मिठा मेरा देश लौटा दो….
सर्व सुखाय वाला मेरा देश लौटा दो….
सोने की चिड़िया वाला स्वर्ण ए मेरा देश लौटा दो…

स्वर्ग से भी सुन्दर कोई मेरा देश लौटा दो….
वतने ए मेरा हिन्दुस्तान लौटा दो….
एक धर्म हिन्दे मेरा हिन्दुस्तान लौटा दो…
कोई मेरा हिन्दुस्तान लौटा दो….
मेरे सपनों का हिन्दुस्तान लौटा दो….!!

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