मैं अच्छा बहुत हूँ


मैं भोला बहुत हूँ, मैं सच्चा बहुत हूँ,
सच कहता हूँ तुमसे ,मैं अच्छा बहुत हूँ,
छिपाता हूँ खुद को, मैं खुद ही के अंदर,
बताने में कुछ भी मैं कच्चा बहुत हूँ,
समझ ना सका मैं ज़माने की नीयत,
बड़ा हूँ मगर अब भी बच्चा बहुत हूँ,
मैं कहना भी चाहूँ, कहूँ भी तो किससे,
ये अच्छे बुरे सारे जीवन के किस्से,
अकेला हूँ पर मैं ये कहता नहीं हूँ,
किसी के सहारे मैं रहता नहीं हूँ,
बहुत आज़माया है लोगों ने मुझको,
इधर की उधर कर फँसाया है मुझको,
ये मतलब की दुनिया, हैं कहते इसी को,
न अपनों को छोड़ा, न छोड़ा किसी को,
जताने में खुद को हिचकता बहुत हूँ,
अकेले में छुप कर सिसकता बहुत हूँ,
छिपाता हूँ खुद को मैं खुद के ही अंदर,
बताने में कुछ भी मैं कच्चा बहुत हूँ,
मैं भोला बहोत हूँ, मैं सच्चा बहुत हूँ,
सच कहता हूँ तुमसे, मैं अच्छा बहुत हूँ..।।

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