मैं


___मैं___
चेहरे से मुस्कान बिखेरती हूं,
चुलबुला सा अंदाज रखतीं हूं,
कोई नहीं जानता मूस्कुराते
चेहरे के पीछे कितने
आंसु छिपाए है मैंने,
रातों को सोती है दुनिया सारी
ना जाने क्यों जागती हूं मैं,
अंधेरा खत्म नहीं होता
मेरी जिंदगी का फिर भी
उजाले की तलाश में निकलती हूं‌।
कोरे कागजों को साथी बनाया है मैंने
इसलिए इन पर शब्दों की
स्याही बिखेरती हूं , सब कुछ
भूलकर अपनी दुनिया में हीं
खोई रहती हूं मैं, अच्छी बुरी बातें
किसी की कहां याद रखूंगी
खुद का ही होश नहीं रहता मुझे,
दुसरो के बारे में क्या सोचूंगी ,
खुद से तो मेरी मुलाकात होती नहीं
किसी और से क्या मिलूंगी,
किसी और की खुशी और
दुख के बारे में क्या सोचूंगी
जब खुद की अधोपक्ष का पता नहीं
वो सोचते कि सबकुछ आसान है,
पर जिंदगी की सच्चाई कुछ और है।।

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