संसार के ‘संस्कार’


संसार के 'संस्कार' माँ, बाप को समर्पित मेरी कुछ पंक्ति
अनय कुराड़ (दीवाना आजादी का) 8395932063
'संस्कार"
है दुनिया देखी सारी मैने, आज अपनी ही बात बताता हूँ,
डाका , चोरी है काम यहाँ के ,आज लिखकर संस्कार बताता हूँ.....
उनकी नजरों से ही देखो दुनिया ,आज मतलब बाप का बताता हूँ.....
किससे करूँगा इच्छा मै, आज खोल दिल को दिखाता हूँ...
अपनो ने लूटा ,अपनो ने मारा ,आज अपनो की बात सुनता हूँ...
लिखना - पढना है जिमेवारी, इससे ही क्यों दूर जाता हूँ...
ये संस्कारी दुनिया है ,लोगों, इसके संस्कार बताता हू..
आजादी है लेनी हमकों, कन्हिया से ही सिख पाता हूँ..
कहाँ-कहाँ से सीखूं संस्कार ,आज उमर खालिद से ही बतलाता हूँ..
पढ़-लिख कर संस्कारी बनूगा, नाम करूँगा रोसन पापा का यही स्वपन देख पाता हूँ...
जब -जब देखूं हालात पापा के ,फिर कलम उठायें पाता हूँ..
ये 'अनय' का सपना है लोगो, इसकी दुनिया ही दिखता हूँ....
अनय कुराड़
लेखक मेरा भारत पुस्तक

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