सपने


इन पलकों में कैद कुछ सपने हैं,
बेगाने हैं कुछ, तो कुछ अपने है,
सारी उम्र आँखों में एक सपने याद रहा,
ना जाने क्या बात थी उनमें,
सारी महफिल भूल गए वह चेहरा याद रहा,
यूँ ही हम किसी से वफा निभा बैठे,
वो हमे एक लम्हा ना दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिए जिंदगी लुटा बैठे,
काश देखे ना होते सपने,
तो वो सर्द राते यूँ दर्द भरी ना होती,
आखिर दर्द हर दिल की जरूरत नहीं,
आँसू आँखो की चाहत तो नहीं,
कैसे बयान करे हाल-ए-दिल,
जी तो रहे हैं लेकिन ये जिंदगी नहीं ।

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