सबसे करीब


सबसे करीब भी है,
और बहुत दूर भी है,
एक झलक पाने को मगर,
दिल में तड़प भी है।

झिझक भी है,
ललक भी है,
ना मिलने की मगर,
हरपल कसक भी है।

तन्हाई भी है,
महफिल भी है,
इन्तजार में मगर,
एक बेचैनी भी है।

मिलन की चाह भी है,
और खुशी भी है,
विरह का मगर,
हृदय में दर्द भी है ।

दिल में भी है,
धड़कन में भी है,
ख्वाबों में नहीं मगर,
रूह में भी है।

ख्यालों में भी है,
अहसासों में भी है,
झलक नहीं मिलती मगर,
नज़र में भी है।

~ नीति श्रीवास्तव ~

Poem Rating:
Click To Rate This Poem!

Continue Rating Poems


Share This Poem