हां मैं आज लिखना चाहता हूं


• दिल में‌ दबे अरमानों को फिर से संजोना चाहता हूं, ख्वाहिशों के इस मंजर को इक बार पिरोना चाहता हूं,
मंद पड़ती मुस्कान को, जो तस्दीक करने की है हसरत, उस हसरत-ए-महोब्बत का इज़हार करना चाहता हूं,
.... हां मैं आज लिखना चाहता हूं !!!

• पल भर को सही जो हम साथ हुए, पूरे भले ही न वो अनकहे अहसास हुए,
मगर गम-ए-रूखसत को आखिर ये सांसें हैं ही कितनी,‌ धुंधलाते अहसासों को कागज़ पर उकेरना चाहता हूं,
....हां मैं आज लिखना चाहता हूं !!!

• काश लिख संकू कुछ ऐसा कि उस चाहत को इबादत हो जाएं, हमको न सही, इस क़लम-ए-स्याही को ही मुहब्बत मुकम्मल हो जाएं,
उन ख़्वाबों से कोरे कागज को रंगीन बनाना चाहता हूं, अधूरी चाहतों के इस मंजर को सीने से लगाना चाहता हूं,
.....हां मैं आज लिखना चाहता हूं !!!

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