हिंदी हमारी मातभाषा


अहो! भाग्य हमारे ,
आई हिंदी दुवार हमारे ।
पग पग घूमी यहां वहां ,
खोजती अपना असतित्व ।
मिले अपनों ( भारत) से ठोकर,
अपनाया गरो ( विदेशो) ने दिल खोलकर।
हैं केसा दुर्भाग्य ,
भूल गए हम ,
है सभाग्य हिंदी हमारी।
अहो ........... दुवार हमारे
हो आई देश- विदेश
अपने हि देश में पाया अछूतो सा व्यवाहर।
हो गई दग देख,
बच्चा ना बोले नमस्कार
क्युकी जो बोले दखे लोग आश्रय से,
है शान अग्रेजी में गुड मॉर्निंग जो बोले।
अहो....... दुवार हमारे
मातृ भाषा होज्ञी ऐसी ,
गिनती ना आवे, आवे काउंटिंग
धर्म चक्र ईश्वर ने ऐसा चलाया,
देश विदेश सब जग एक ही नारा ,
चले हिंदुस्तान के पुराडो सस्करो की ओर।
अहो.... दुवार हमारे

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