22 december


एक कहानि अधूरी है !!

कुछ पल की खुशी के बाद, एक गमो का झोका आया
ना मिली कोई बेवफाई, ना कोई मैंने धोका पाया !!
कुछ रिश्तो मे प्यार से ज्यादा होती बस मजबूरी है
मेरी भी एक कहानि थी जो अब तलक अधूरी है!!

दर्द हुए इख़ते से टूटना बिखरना फिर आया !!
क्या हुआ ओर क्यों हुआ अब तलक ना समझ पाया !!!
दिल मे मेरे पास है वो, पर हकीकत मे बस दूरी है
मेरी भी एक कहानि थी जो अब तलक अधूरी है !!

कुछ समझ नहीं आता है क्या गलत अब क्या सही
मै हों यहाँ तो तू भी है यहीं !!
चोट खाकर दर्द को लिखना यही मेरी अब मशौरी है
मेरी भी एक कहानि थी जो अब तलक अधूरी है !!

काफ़ी दिन हो चुके है पर अब तक ना मै संभल पाया
नये साल की शुरुवात से पहले वो दिन भी था गज़ब आया !!
मन करता है रो लू मै पर हसना मेरी मजबूरी है
कहानि है जो मेरे हाल की वो रेहनी ही अधूरी है !!

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