Bhagwan ne kya sochkar tumhe jami par utara h


तुम्हे पाने की आस छोड़ चूका था,
ये वक़्त घुमा फिर दोबारा है !
तू हसी, तू नायाब, तू आफरीन,
ये रुतबा इस जहा में तुम्हारा है !
ना जाने भगवान् ने क्या सोचकर,
तुम्हे जमी पर उतiरा है !
सबने मांगी दुआ, लेकिन सिर्फ मेरी दुआ में असर नज़र आया,
पल-पल सोचा तुझे, फिर भी ये दिल थोड़ा सा घबराया है !
तू परी, तू अप्सरा, तू इश्क़,
आसमान में चमकता सितारा है !
दिल में तू, दिमाग में तू, हर तरफ है तू,
अब जीना मुश्किल हमारा है !
ना जाने भगवान् ने क्या सोचकर,
तुम्हे जमी पर उतरा है !
मेरी ख़ुशी, मेरा प्यार, मेरा दर्द, सब तू ही है,
तेरा ना होना ना मुझको गवारा है !
तुझे सोचना, तुझे चाहना, तुझे पाना,
बस ये ही काम तो आजकल हमारा है !
तुझे देखु तो सब अच्छा लगे, ना देखु तो बुरा,
तू मेरी थी, मेरी है, मेरी रहेगी,
खुदसे वादा ये अब हमारा है !
ना जाने भगवान् ने क्या सोचकर
तुम्हे जमी पर उतरा है !
सोचा ना था कि मिलेंगे हम इस तरह,
कितना हसीन ये प्यारा नज़ारा है !
तू है मेरी, बस मेरी ही रहना,
दिल ये कहता फिर से दोबारा है !
ना जाने भगवान् ने क्या सोचकर
तुम्हे जमी पर उतरा है !
वो वक़्त गया, वो पल गये,
जब तुझे मिलना नाकाम लगता था,
बहोत पहले हार मान चूका था,
ना जाने ये दिल डरता था,
वक़्त बदला, लोग बदले
आज, तेरा दिल भी हमारा है !
तुझ पे शुरू, तुझ पे खत्म
ये बचा हुआ जीवन, जो सारा है !
ना जाने भगवान् ने क्या सोचकर
तुम्हे जमी पर उतरा है !

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