Dosti


तुमहारी दोसती एक खयाब जैसी
फुलो सी ,महक सी, एक एहसास जैसी
इस एक पल महसुस करु एहसास अैसे
बिन मौसम की बारिश हो जैसे
आज भी याद करु उन दिनो को अैसे
तुमहारी हँसने की आबाज कानो मे गुजे जैसे
हर वकत रब से दुआ मांगु अैसे
कि तु सदा मुसकुराये पहले जैसे
तुमहारी दोसती एक खयाब जैसी
फुलो सी ,महक सी, एक एहसास जैसी
तुम मेरे दिल के बहुत करीब हो
पर यह बात मै तुमहे बताउ कैसै
तुम मेरे अपने से हो
तुम पे अपना हक मै जताउ कैसे
तुम से हजार शिकायते है
लेकिन शबदो से दिल से नही दोसत
मुझ से बहुत सी गलतियॉ होई है
हो सके तो माफ कर देना दोसत
खैर
अगर बात नही करनी तो मत करना
मगर तुम हमेशा खुश रहना ऐ दोसत
जब भी महसुस होगी हमारी जरुरत
बिना कुछ सोचे समझे चले आना ऐ दोसत
और एक बात याद रखना
खुशिया बॉटने के लिए दोसत हजार रखना
पर जब गम बॉटना हो तो हमे याद करना
~मनजोत कौर

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