Gazal


जानी! तेरी आँखों की निगरानी करनी है,
थोड़ी ही सही ख़ुद पर मेहरबानी करनी है।

साहिल का मज़ा बहुत चख लिया हमने,
अब कश्ती-ए-मोहब्बत की रवानी करनी है।

यारा! तेरे बगैर दम घुटने लगा है अब,
तुझे पाकर जीने में आसानी करनी है।

इश्क़ में बड़ा होना लाज़मी नहीं लगता मुझे,
तेरे संग बचपन वाली नादानी करनी है।

गीले-शिक़वे भी दूर करने हैं इक रोज़ हमें,
गले मिलकर पूरी,ये अधूरी, कहानी करनी है।

कई सालों से दबा के रख़ा है दिल में मैंने,
तू आ तो सही, कई बातें पुरानी करनी हैं।

तेरे करीब रहने की चाहत को ग़लत ना समझ,
इस ज़ालिम ज़माने से तेरी निगहबानी करनी है।

होंठों की तलब औरों को होती होगी,
हमें तो मोहब्बत-ए-पेशानी करनी है।

--सोमेश

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