Kalmase


वो गांव का लड़का .....buring body is less painful than burring your dream
खोगया जो इस शहर की चकाचौध भरी दुनिया में मुसाफिर बनकर वो कभी अपने गांव का होनहार हुआ करता था........
तलाश रहा है अपने अस्तित्व को फिर से जो इस चकाचौंध की दुनिया में जिसका कभी उसके कबीले में हर बात पर जिक्र हुआ करता था.......
तिनका तिनका जोड़कर बनाना चाहता है जो अपना कोना इस
शहर के कोने में जिसका कभी उस गांव में आलिशान घर करता था............
आज जो भटक रहा है बेसब्रो की तरह यहा से वहा वो कभी अपने गांव का सब्र हुआ करता था.....
घुट रहा है वो उन्ही सपनो के बोझ के तले जो सपना कभी उसका प्राण हुआ करता था ......
खोगया जो इस शहर की चकाचौध भरी दुनिया में मुसाफिर बनकर, वो कभी अपने गांव का शान हुआ करता था ......

©kalamse

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