karmapath


बढ़ चलो संघर्ष पथ पर
जीत हो या हार सर पर
कर्म से विचलित न होओ
धैर्य अरू धीरज न खोओ
दिख रही मंजिल तुम्हारी
झिलमिलाती रोशनी मे
कर्म का लेकर सहारा
पग बढ़ा पीछे न होओ

तुम प्रबल भागीरथी की धार हो
तुम आलौकिक आत्मा अवतार हो
बढ़ते रहो निज धार को रोको नही
आसरे तुम भाग्य के खुद को कभी झोको नही
बस भाग्य से अरू हस्त रेखा से कोई बढ़ता नही
निर्माण तेरे भाग्य का बिन कर्म के गढ़ता नही
फौलाद जैसी हड्डियाँ और नाड़िया है पास मे
निर्माण अपने भाग्य का क्यो आप से करता नही
कर्मपथ पर बढ़ चलो
निज भाग्य का रोना न रोओ
दिख रही मंजिल तुम्हारी झिलमिलाती रोशनी मे
कर्म का लेकर सहारा पग बढ़ पीछे न होओ

Akhilendra tiwari kavi
S.r.v.p. gonda uttar pradesh
8318627338

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