Kathdaputli ki aazaadi


कठपुतली ki aazadi
मंच पे खड़ी, डोरियों से बँधी
रंगीन वस्त्रों और आभूषणों में सजी,
मैं एक कठपुतली mangu aazadi।

लकड़ी से बने मेरे ये अंग,
किसी दूसरे की मर्ज़ी पर चलते हैं,
मैं हूँ तो केवल सजावट और मनोरंजन के लिए,
एक नारी समान।

इन वस्त्रों की चमचमाती खूबसूरती के पीछे,
छुपे हैं मेरे संग हुए ज़ुल्म एवं अत्याचार।

मै एक कठपुतली हूँ.......
डोरी से na ho मेरा काम,
डोरी से na ho मेरा नाम,
डोरी se aazad ho मेरे अरमान,
और डोरी संग मेरी ज़िंदगी ki aazadi ।

श्रेय आनंद(Student) IBDP-Y2 2018-19

Poem Rating:
Click To Rate This Poem!

Continue Rating Poems


Share This Poem