Lockdown


#lockdown

एक अनजाने मेहमान की दस्तक से,,
में चार दिवारी के भीतर बन्द हूं।।

पर ये ना समझो हार गया बस थोड़ा सा बेचैन हूं,,
कोरोना से छिड़े युद्ध मे मेरा रक्षक में स्वयं हूं।।।

शोर - गुल को त्याग जीवन से,,
सन्नाटे के साये मे गुम हूं।।
आसमां घिरा तारों से,,
पर गलियों में चमकते सितारों से अनजान हूं।।

पर ये ना समझो हार गया बस थोड़ा सा बेचैन हूं,,
कोरोना से छिड़े युद्ध मे मेरा रक्षक में स्वयं हूं।।

ठहर गया हूं अपने पथ से,,
मानो थका हुआ राहगीर हूं।।
डर लगता है अपनों में छुपे दुश्मन से,,
अपने देश के लिए चिंतित हूं।।

पर ये ना समझो हार गया बस थोड़ा सा बेचैन हूं,,
कोरोना से छिड़े युद्ध मे मेरा रक्षक में स्वयं हूं।।

पुरानी तस्वीरों को निकाल बक्से से,,
बचपन के लम्हों में खोया हूं।।
बिन त्यौहार अपनों संग हस्ता - गाता ,,
मानो गहरी नींद के सपने में हूं।।

पर ये ना समझो हार गया बस थोड़ा सा बेचैन हूं,,
कोरोना से छिड़े युद्ध मे मेरा रक्षक में स्वयं हूं।।

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