Mera ishq meri kavita


ए बादल जब जब मैं दुखी हो जाऊं तो बरस जाया कर
वो क्या है ना मुझे आंसू छुपाना नहीं आता
इश्क़ तो हमे उनसे बेहिसाब है पर क्या करें
हमे इश्क़ जताना नहीं आता
उन्हें दूर से देख कर ही जी भर लेते है
क्योंकि पास रहकर उनसे नज़रें मिलाना नहीं आता
कविताएं तो हमने उन पर बहुत लिखी है
पर शर्म के मारे उन्हें सुनाना नहीं आता

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