Mera nazariya


आत्महत्या

जब दिल मे उथल पुथल हो जाये,
जब राहे ओर कठिन हो जाये,
जब मन मेरा डगमगा सा जाये,
मैं चाहू मुझे मौत आ जाये।।

मरने को चली मैं नादान ,
सोचती हूँ, अकेली मैं परेशान ,
फ़िक्र नहीं मुझे किसी की,
क्योंकि खुदगर्ज है ये जहां।।

ख़त्म कर दू खुद को मैं,
मिटादु अपना नामो निशान,
ऐसा करने से चलो ,
ख़त्म हो जायेगा एक इंसान।।

साँसे रोक लूँ,दुनिया से मुह मोड़ के,
जाना चाहती हूँ,सबको छोड़ के।।

अगर कभी ऐसा ख्याल भूले से भी आ जाए,
अगर सारा संसार मुझे मेरे खिलाफ नजर आए,
याद करू तब मैं उनको,जो मुझे इस संसार में लाये।
याद करू में उनको,जिन्होंने जीने के मायने मुझे सिखाये।।

फिर ना मैं मौत से डरूँगी,
खुद मैं आत्मविश्वास भरूँगी,
आत्महत्या है सबसे बड़ा जुल्म,
कभी ऐसा खयाल मन में ना आने दूंगी।।

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