Nai suruaat


ठोकरें खा कर
जो एक नई शुरूआत
कि थी हमने
वह एक पल में
बिखर गया।
जीवन कि जो
एक नई शुरुआत
कि थी हमने
वह बस युही
बिखर सा गया।
बस इसलिए
कि वो जीवन
पुरूष का नहीं?
वो जो हमने
सपने सजाय थे
सब एक पल
मे बिखर गया।
वो एक लड़की थी
इस लिया मुझे
तकलीफ दी गई?
उस मे भला मेरा
क्या कसूर?

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