ONLINE CLASSES


ऑनलाइन क्लासेज एक टीचर जैसा कहां समझा पाती है ।
प्यार भरी डांट भला एक ऑनलाइन क्लासेज कहां दे पाती है ।
प्रार्थना सभा में लेट आने पर अलग पक्ति में बैठा कर
(हे भगवान प्लीज आज आज बचा लो)
ऐसी‌ मासूम प्रार्थना भला ऑनलाइन क्लास कहां करा पाती है । ऑनलाइन क्लासेज
शोर मचाने पर "गेट आउट फ्रॉम माय क्लास"भला ऑनलाइन क्लासेज कहां कह पाती है ।
ऑनलाइन क्लास...
शिक्षक जैसी कहां समझा पाती है.....
"हू नोज दिस क्वेश्चन आंसर"पूछने पर भीड़ में झूठे हाथ ऊचे कर "मुझ पर आता है"......... ऐसा दिखावा कहां करा पाती है......भला ऑनलाइन क्लास एक शिक्षक जैसे कहां समझा पाती है ..

बात बात में विद्या की कसम खाने की आदत भला ऑनलाइन क्लास कहां डाल पाती है....
ऑनलाइन क्लास एक शिक्षक जैसे कहां समझा पाती है।
हिटलर शिक्षक के स्कूल में में न आने की असीम खुशी बच्चों को ऑनलाइन क्लास कहां दे पाती है,.....भला ऑनलाइन क्लास एक शिक्षक जैसे कहां समझा पाती है।
अपने पसंदीदा शिक्षक की स्कूलमें न आने पर मायूस चेहरे की उदासी भला ऑनलाइन क्लासेज कहां दिखा पाती है।
चलती कक्षा में टॉफी खाने का मजा आएगा ऑनलाइन क्लासेस कहां दे पाती है......
भला ऑनलाइन क्लास एक शिक्षक‌ जैसे कहां समझा पाती है।
एक शिक्षक के जैसे बच्चों के होमवर्क नहीं करने पर रोजाना अलग-अलग बहाने सुनने का मजा ऑनलाइन क्लास कहां ले पाती है।.....
टन टन की आवाज होने पर ,"छुट्टी हो गई छुट्टी हो गई" कहने का भला ऑनलाइन क्लास कहां मौका दे पाती है...........
भला ऑनलाइन क्लास एक शिक्षक जैसे कहां समझा पाती है

Poem Rating:
Click To Rate This Poem!

Continue Rating Poems


Share This Poem