Sushant Singh Rajput


लकड़ा मै छोटे शहर का लेकिन मेरे सपने बड़े थे,
सपने में हज़ार सवाल खडे थे,
खड़े थे कई लोग मेरे सपने के आगे क्या पता था देखते देखते हम धीरे धीरे उनमें ही दबे थे,
दबे थे दुनिया दारी में ,अपने सपनों को दरकिनार करके,
सोचा था नासा जीतेगे, जीतेगे हज़ार ख्वाब,
क्या पता था इन ख्वाबों के साथ ही अलीम से रूख़सत हो जाएंगे।
Written by:- vidiksha

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