VERMA


दिल में बढती बैचेनी,मेरा दिल भी घबराये
इश्क के समन्दर में,हम दोनो का मिलन हो जाये

बढती है आगोशी, थोडी़ खामोशी हो जाये
प्यार का खत है कहीं,पढ़ने मे देरी न हो जाये

लफ्ज बयाँ नही होते तेरे इश्क में
हम तो तेरे सीरत के मारे है
बिछडने का तो पता नही
हम तो तुमसे मिलने के दिवाने है ।

कोई नगम़ा मेरे दिल का
चुरा बैठा है कोई साथी
बता दो तुम नजर ना फेरो
ये दिल दे बैठा हूँ तुझे में दोस्त ।

मिला ना कोई तेरे जैसा
बता दो उसे वो यूँ ना दिल तोडे़
नजर क्यों फेरती हो तुम
दिवाना हूँ मैं तेरा दोस्त ।

उम्र में तुम बड़ी हो तो
मुझे तो सिर्फ तेरा साथ चाहिए
बता देना मुझे तुम दोस्त
दिवाना हूँ मैं तेरा,साथ निभाना मेरे दोस्त ।

कोई आशा कोई भाषा
समझ हमको नही आती
प्यार की धुन में मै डूबा हूँ
मुझे तो बस तेरा प्यार चाहिए ।

कोई नगमा मेरे दिल को
चुरा बैठा है कोई अफसाना
तुम बताओ मेरे दिल को
मैं साथ निभाऊँगा तेरा दोस्त ।

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